बेरियर को तोड़ने वाले धाबक भारत के पहले एथलीट

बेरियर को तोड़ने वाले धाबक भारत के पहले एथलीट

2018 में Muhammed Anas Yahiya ने 400m रेस में इंडियन नेशनल रिकॉर्ड बनाया। उनका टाइम 45.21 सेकंड था। विशाल TK ने बाद में 44.98 सेकंड में दौड़कर यह रिकॉर्ड तोड़ा,और 45 सेकंड से कम समय में रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय बन गए

विशाल TK का सफ़र केरल के साधारण हालात से शुरू हुआ था लेकिन आज उन्हें पूरे भारत में जाना जाता है। केरल को पहले से ही भारतीय एथलेटिक्स का केंद्र माना जाता है। यहाँ से कई बेहतरीन एथलीट निकले हैं और विशाल TK अब उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

कड़ी मेहनत और संघर्ष से नया मुकाम हासिल करने वाले विशाल T.K आज भारतीय एथलेटिक्स में एक जानी-मानी हस्ती बन गए हैं।

केरल के एक छोटे से गांव से आने के कारण उनके लिए नेशनल रिकॉर्ड बनाना आसान नहीं था। बचपन में उन्हें नॉक-नी की बीमारी थी

जिससे उनके लिए चलना और दौड़ना मुश्किल हो जाता था। लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी उनके पिता ने उनके पैरों की हालत सुधारने के लिए उन्हें हर दिन रेत में ट्रेनिंग दी। यही संघर्ष बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

शुरुआत में विशाल T.K ने 100 मीटर और 200 मीटर की छोटी रेस में हिस्सा लिया। उनकी स्पीड अच्छी थी लेकिन कोच को एहसास हुआ कि उनमें 400 मीटर के लिए एक अनोखा टैलेंट है। बाद में

उन्होंने 400 मीटर रेस के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार करना शुरू कर दिया। सालों की कड़ी ट्रेनिंग फिटनेस और मेंटल स्ट्रेंथ के बाद धीरे-धीरे उनकी परफॉर्मेंस बेहतर होती गई

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भारत में 400m रेस को हमेशा से एक मुश्किल रेस माना जाता रहा है क्योंकि इसमें न सिर्फ़ स्पीड बल्कि स्टैमिना और रेस टाइमिंग भी ज़रूरी होती है।

विशाल ने इस इवेंट में इतिहास रच दिया। वह 45 सेकंड का बैरियर तोड़कर 44.98 सेकंड में यह कामयाबी हासिल करने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। इस रिकॉर्ड ने पूरे देश का ध्यान खींचा और भारतीय एथलेटिक्स में एक नए युग की शुरुआत की।

वह न सिर्फ़ रिकॉर्ड बनाने के लिए जाने जाते हैं बल्कि अपने शांत और सादगी के लिए भी जाने जाते हैं। बड़े रिकॉर्ड बनाने के बावजूद वह विनम्र बने हुए हैं।

इंटरव्यू में उन्होंने बार-बार कहा है कि उनका सपना सिर्फ़ रिकॉर्ड बनाना ही नहीं है बल्कि ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीतना भी है। यही रवैया उन्हें दूसरे एथलीटों से अलग करता है

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विशाल का परिवार काफी साधारण माना जाता है इसी वजह से अपने शुरुआती दिनों में उन्हें खास सुख-सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। फिर भी सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बार-बार अपना अभ्यास जारी रखा।

रिपोर्टों के अनुसार शुरुआत में उन्होंने स्थानीय एथलेटिक्स शिविरों और राज्य-स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपने कौशल को निखारने का प्रयास किया। धीरे-धीरे उनका प्रदर्शन इस हद तक बेहतर हो गया कि राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की नज़र उन पर पड़ गई।

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