गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान गणेश के जन्मोत्सव का प्रतीक है और पूरे भारत में विशेष रूप से महाराष्ट्र गोवा गुजरात कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन घर या पंडाल में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और 1 दिन से लेकर 10 दिनों तक उनकी पूजा की जाती है
पूजा से पहले की तैयारियाँ >
स्थान की सफाई>
पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें
आस-पास की जगह पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें
पूजा सामग्री >
गणेश जी की मूर्ति (मिट्टी या धातु की, पीतल/चांदी की भी रख सकते हैं)
दूर्वा घास ,21 टुकड़े
लाल या पीले फूल (गेंदे के फूल विशेष शुभ माने जाते हैं)
मोदक या लड्डू का भोग
पान के पत्ते सुपारी नारियल
रोली अक्षत (चावल) कुमकुम
धूप दीपक कपूर
लाल/पीला कपड़ा माला कलावा
पंचामृत (दूध दही शहद शक्कर घी का मिश्रण)

पूजा की विधि >
गणेश जी की स्थापना>
शुभ मुहूर्त में घर के पूजा स्थल या पंडाल में लकड़ी के पाट पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें
मूर्ति को चारों ओर फूल-पत्तियों से सजाएँ
संकल्प लें >
पूजा शुरू करने से पहले अपने दाहिने हाथ में चावल और फूल लेकर संकल्प लें कि आपगणेश जीकी चतुर्थी का व्रत और पूजा पूरी श्रद्धा से करेंगे
संकल्प में अपना नाम गोत्र और तिथि लिखें।
गणेश जी का आह्वान करें >
दीप और धूप जलाएँ
मंत्र पढ़ें>
ॐ गं गणपतये नम- आवाहयामि स्थापनायामि
गणेश जी को मन वचन और कर्म से अपने घर आने का निमंत्रण दें
स्नान और वस्त्र अर्पित करें >
गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएँ यदि धातु की मूर्ति है तो जल और गंगाजल से भी स्नान करा सकते हैं
साफ़ वस्त्र या परिधान पहनें लाल या पीले वस्त्र शुभ माने जाते हैं
श्रृंगार और सजावट >
गणेशजी को फूल माला और चंदन लगाएँ
माथे पर कुमकुम और रोली का तिलक लगाएँ।
अर्पण, प्रसाद और सामग्री >
गणेशजी को दूर्वा घास के 21 टुकड़े अर्पित करें क्योंकि यह अत्यंत प्रिय है
मोदक लड्डू या गुड़-नारियल के लड्डू चढ़ाएँ
पान सुपारी नारियल फल आदि अर्पित करें
मंत्र जाप >
ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें
आप चाहें तो गणेश अथर्वशीर्ष गणेश स्तोत्र या गणपति चालीसा का पाठ करें
आरती >
कपूर और घी का दीपक जलाएँ और गणपति बप्पा की आरती करें।
पूरे परिवार के साथ ‘जय गणेश जय गणेश देवा’आरती गाएँ
प्रसाद वितरण >
भोग को घर के सभी सदस्यों और मेहमानों में प्रसाद के रूप में बाँटें।
इस दिन प्रसाद में मोदक का विशेष महत्व होता है
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को प्रसन्न करने के ये हैं फायदे

इन बातो का ध्यान रखे >
पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन शराब और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
दूर्वा घास ताज़ा होनी चाहिए और उसमें तीन गांठें होनी चाहिए
गणेश जी को तुलसी के पत्ते न चढ़ाएँ यह वर्जित है
पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखें
यदि आप कई दिनों के लिए गणपति स्थापना कर रहे हैं तो प्रतिदिन सुबह और शाम आरती और भोग अवश्य लगाएँ
गणेश चतुर्थी का व्रत मन और तन को शुद्ध रखता है
व्रत के दौरान फल दूध मेवे या सात्विक भोजन का सेवन किया जा सकता है
स्थापना के अंत में अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाता है जिसमें उन्हें जल में प्रवाहित करके विदाई दी जाती है और उनसे अगले वर्ष पुन आने की प्रार्थना की जाती है
गणेश चतुर्थी की पूजा की सही विधि अपनाकर आप न केवल भगवान गणेश को प्रसन्न कर सकते हैं बल्कि अपने जीवन में सुख समृद्धि और सफलता का मार्ग भी खोल सकते हैं इस त्योहार का सार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन में भक्ति अनुशासन और सकारात्मकता का समावेश करना है
Sant Shri Asharamji Bapu बताते हैं #GaneshChaturthiVishesh DOs And DONTs - गणेश चतुर्थी के दिन गणेश उपासना का विशेष महत्त्व है। गणेशजी की प्रसन्नता के लिए ‘गणेश गायत्री’ मंत्र का जप करें- महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्। इस दिन चंद्रदर्शन निषिद्ध है। pic.twitter.com/czS54kQHua
— Ashram Jodhpur (@AshramJodhpur) September 6, 2024

