मछुआरा समुदाय की जीवनशैली जिसमें समुद्र पर सजी हुई नावें परेड करती हैं दीव फिशिंग फेस्टिवल
दीव मत्स्य महोत्सव दीव का एक बेहद खास और पारंपरिक त्योहार है जो मछुआरा समुदाय की जीवनशैली संस्कृति और समुद्र के साथ उनके गहरे रिश्ते को दर्शाता है यह महोत्सव हर साल मानसून खत्म होने के बाद मनाया जाता है जब समुद्र शांत हो जाता है और मछली पकड़ने का नया मौसम शुरू होता है मानसून के दौरान मछुआरे समुद्र में नहीं जाते क्योंकि लहरें ऊँची होती हैं और मौसम अनिश्चित होता है लेकिन जैसे ही बरसात का मौसम खत्म होता है समुद्र अपनी धीमी लय में लौट आता है और मछुआरे नए जोश के साथ अपने जाल और नावों के साथ मछलियाँ पकड़ने की तैयारी में लग जाते हैं
यह त्यौहार अक्सर समुद्र तट पर एक पारंपरिक पूजा के साथ शुरू होता है जहाँ मछुआरे भगवान वरुण से साल भर सुरक्षित और सफल मछली पकड़ने का आशीर्वाद मांगते हैं यह पूजा एक सामूहिक आयोजन है जहाँ सभी नावों को किनारे पर लाया जाता है और बड़े प्यार से सजाया जाता है नावों को रंग-बिरंगे झंडों फूलों और चमकदार रोशनियों से सजाया जाता है जिससे पूरा तट मेले जैसा नजारा बन जाता है स्थानीय लोग और पर्यटक इस अवसर पर बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं और समुद्र में सजी हुई नावों के शानदार जुलूस को देखते हैं यह दृश्य किसी समुद्री परीकथा जैसा लगता है जहाँ लहरों के बीच तैरती रंग-बिरंगी नावें एक अद्भुत नजारा प्रस्तुत करती हैं.
कब मनाया जाता है
यह त्यौहार आमतौर पर मानसून सितंबर-अक्टूबर के बाद आयोजित किया जाता है जब समुद्र शांत हो जाता है और मछली पकड़ने का नया मौसम शुरू होता है
मत्स्य महोत्सव का मुख्य आकर्षण मछली पकड़ने की प्रतियोगिता है न केवल मछुआरों बल्कि कभी-कभी पर्यटकों को भी इसमें भाग लेने का अवसर दिया जाता है प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल जीतना नहीं बल्कि मछली पकड़ने की कला और समुद्री कौशल का प्रदर्शन करना भी है सबसे बड़ी या सबसे ज़्यादा मछलियाँ पकड़ने वालों को पुरस्कार और सम्मान दिया जाता है यह प्रतियोगिता मछुआरों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिस्पर्धा और एकता की भावना को और मज़बूत करती है
इस उत्सव के दौरान दीव का वातावरण पूरी तरह सांस्कृतिक रंगों में रंग जाता है। पुर्तगाली प्रभाव वाले लोक नृत्य लोक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाती हैं कई जगहों पर छोटे-छोटे मंच सजाए जाते हैं जहाँ स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों का उत्साह और ऊर्जा इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देखने लायक होती है यह उत्सव केवल मछुआरों का ही नहीं बल्कि पूरे समुदाय का उत्सव बन जाता है जहाँ हर कोई किसी न किसी रूप में योगदान देता है
खाने-पीने के स्टॉल इस उत्सव की जान हैं ताज़ी पकड़ी गई मछलियों से बने विभिन्न समुद्री व्यंजन यहाँ आसानी से मिल जाते हैं पर्यटक और स्थानीय लोग गरमागरम तली हुई मछली फिश करी ग्रिल्ड सीफूड और पुर्तगाली शैली के व्यंजनों का आनंद लेते हैं खाने का स्वाद और ताज़गी इतनी लाजवाब होती है कि कई लोग सिर्फ़ खाने का आनंद लेने के लिए ही इस उत्सव में आते हैं

उत्सव की खासियत
नाव सजावट और समुद्री जुलूस
मछुआरे अपनी नावों को रंग-बिरंगे झंडों फूलों और लाइट्स से सजाते हैं
सजाई गई नावें समुद्र में परेड करती हैं जिसे स्थानीय लोग और पर्यटक किनारे से देखते हैं
पारंपरिक पूजा
समुद्र और भगवान वरुण की पूजा की जाती है ताकि पूरे साल सुरक्षित और भरपूर मछली पकड़ने का आशीर्वाद मिले
मछली पकड़ने की प्रतियोगिता
सबसे बड़ी या सबसे ज्यादा मछली पकड़ने वालों को पुरस्कार दिए जाते हैं।
इसमें कई बार पर्यटकों को भी भाग लेने का मौका मिलता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
लोक नृत्य फोक म्यूजिक और पुर्तगाली प्रभाव वाले डांस परफॉर्मेंस होते हैं
स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाते हैं जिनमें ताज़ी मछली से बनी डिशेज़ लोकप्रिय होती हैं
खेल और जल गतिविधियाँ भी इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं नौका दौड़ बीच वॉलीबॉल और जल क्रीड़ा जैसे आयोजन इस उत्साह और रोमांच को और बढ़ा देते हैं कई लोग पहली बार नौका विहार का अनुभव करते हैं और इस खूबसूरत द्वीप की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए समुद्र में उतरते हैं
दीव मत्स्य महोत्सव का गहरा सांस्कृतिक महत्व है यह केवल मछली पकड़ने का उत्सव नहीं है बल्कि मछुआरा समुदाय के लिए यह समुद्र के साथ उनके रिश्ते का प्रतीक है यह उनकी आजीविका परंपरा और आस्था का संगम है समुद्र उनके लिए केवल रोजगार का स्रोत नहीं बल्कि जीवनदायिनी है और इस उत्सव के माध्यम से वे इसके प्रति अपना सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं इस उत्सव का माहौल इतना जीवंत और रंगीन होता है कि जो कोई भी इसे एक बार देखता है यह अनुभव उसके मन में हमेशा के लिए अंकित हो जाता है

