शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार और खास व्रत

शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार और खास व्रत

शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है जिसे पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नौ दिनों तक चलता है और दशमी तिथि को विजयादशमी या दशहरा के रूप में संपन्न होता है। शारदीय नवरात्रि को शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है और इसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है

नवरात्रि के दौरान भक्त व्रत और संयम का पालन करते हैं इस व्रत का मुख्य उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करना है। व्रती पूरे दिन फलाहार और सात्विक भोजन करते हैं कई लोग पूरे नौ दिनों तक केवल फल दूध सूखे मेवे खाते हैं या दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं। अनाज लहसुन प्याज और मांसाहारी भोजन का पूरी तरह से त्याग कर दिया जाता है। इस व्रत में आलू सिंघाड़े कुट्टू के आटे साबूदाना और मूंगफली आदि से बने व्यंजन मुख्य रूप से खाए जाते हैं

कलश स्थापना >

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है इसमें मिट्टी से भरे बर्तन में जौ बोए जाते हैं और उस पर जल से भरा कलश स्थापित करके माँ दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इन जौ की हरियाली समृद्धि और जीवन का प्रतीक मानी जाती है। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती, देवी भागवत या दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है। प्रतिदिन माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों – शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री – की पूजा की जाती है।

व्रत के दौरान भक्ति गीत गाना गरबा और डांडिया नृत्य एक विशेष परंपरा है यह त्यौहार सांस्कृतिक रूप से विशेष रूप से गुजरात और महाराष्ट्र में बहुत जीवंत दिखाई देता है उत्तर भारत में कई स्थानों पर रामलीला का आयोजन किया जाता है और रामायण के प्रसंगों का मंचन किया जाता है। इस पूरे त्यौहार का वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण रहता है

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कन्या पूजन की परंपरा >

नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है इसमें छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है और दक्षिणा व उपहार दिए जाते हैं। मान्यता है कि कन्या पूजन से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को शक्ति समृद्धि और शांति प्रदान करती हैं

शारदीय नवरात्रि का समापन दशहरे के दिन होता है जब बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाता है और पूरे समाज में अच्छाई की जीत का संदेश फैलाया जाता है इस प्रकार शारदीय नवरात्रि न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है जो लोगों को अनुशासन संयम और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है

Sharadiya Navratri
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