गुजरात की सांस्कृतिक पहचान हैं गरबा और डांडिया नृत्य महोत्सव की तैयारियां
गरबा और डांडिया उत्सव गुजरात की सांस्कृतिक पहचान हैं जो पूरे राज्य में खासकर नवरात्रि के अवसर पर बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं इस उत्सव की तैयारियाँ कई हफ़्ते पहले से शुरू हो जाती हैं और लोग पूरे उत्साह और भक्ति के साथ इसमें भाग लेते हैं गरबा और डांडिया केवल नृत्य नहीं हैं बल्कि ये शक्ति एकता और आनंद की आराधना का भी प्रतीक हैं
पहली तैयारी आयोजन स्थल की सजावट की होती है गाँवों से लेकर बड़े शहरों तक चौराहों मैदानों और सामुदायिक भवनों को सजाया जाता है रंग-बिरंगी झालरों रोशनियों और फूलों से पूरा माहौल उत्सवमय बना दिया जाता है पंडालों में देवी दुर्गा की मूर्ति स्थापित की जाती है और उसके चारों ओर गरबा का घेरा बनाया जाता है कई जगहों पर थीम आधारित सजावट भी की जाती है जिससे पंडाल और भी आकर्षक लगते हैं

उत्सव का एक अहम हिस्सा >
लोगों के कपड़ों की तैयारी भी इस उत्सव का एक अहम हिस्सा है महिलाएं चनिया-चोली पहनती हैं जिस पर चटकीली कढ़ाई और शीशे का काम होता है पुरुष पारंपरिक केड़िया और धोती पहनते हैं। हर कोई अपने पहनावे को सबसे खास बनाने की कोशिश करता है कपड़े खरीदने के लिए बाजारों में भारी भीड़ होती है और बुटीक से लेकर स्थानीय दुकानों तक ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ जाती है गहनों का चुनाव भी गरबा और डांडिया की तैयारी का एक बड़ा हिस्सा है। चांदी और ऑक्सीडाइज़्ड गहने भारी हार चूड़ियाँ और झुमके पहनने का खास चलन है
संगीत और ढोल की व्यवस्था भी तैयारियों का एक अहम हिस्सा है आयोजन समितियाँ स्थानीय और प्रसिद्ध कलाकारों को बुलाती हैं ढोल झांझ और आधुनिक डीजे की धुन पर लोग रात भर नाचते हैं। युवा कई दिन पहले से ही संगीत का अभ्यास करने के लिए इकट्ठा होने लगते हैं। पारंपरिक गरबा गीतों से लेकर आधुनिक फ्यूजन संगीत तक सब कुछ इस दौरान सुनने को मिलता है।
नृत्य का अभ्यास भी पहले से शुरू हो जाता है। लोग स्कूलों कॉलेजों और मोहल्लों में समूहों में गरबा और डांडिया के स्टेप्स का अभ्यास करते हैं। शाम के समय महिलाएं और लड़कियां अपने घरों की छतों और आँगन में इकट्ठा होकर गरबा मंडलियाँ बनाती हैं कई जगहों पर डांडिया प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं जिससे लोग और भी ज़्यादा उत्साहित और तैयार हो जाते हैं

सुरक्षा और प्रबंधन की तैयारियाँ >
सुरक्षा और प्रबंधन की तैयारियाँ भी बेहद ज़रूरी हैं आयोजन समितियाँ पुलिस और स्वयंसेवकों की मदद से भीड़ को नियंत्रित करने के इंतज़ाम करती हैं प्रकाश व्यवस्था ध्वनि व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की भी पहले से योजना बनाई जाती है। बड़े आयोजन स्थलों पर चिकित्सा दल और प्राथमिक उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं
खान-पान भी इस उत्सव की तैयारियों का एक अहम पहलू है गरबा और डांडिया के दौरान कार्यक्रम देर रात तक चलते हैं इसलिए जगह-जगह खाने-पीने के स्टॉल लगाए जाते हैं। ढोकला फाफड़ा, खांडवीजलेबी और छाछ जैसे गुजराती व्यंजन हर जगह उपलब्ध रहते हैं
सोशल मीडिया और प्रचार-प्रसार के लिए भी विशेष तैयारियाँ की जाती हैं आयोजक पोस्टर बैनर और ऑनलाइन कैंपेन के ज़रिए कार्यक्रम की जानकारी देते हैं। टिकट बिक्री और पास वितरण की व्यवस्था पहले से ही कर ली जाती है ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित हो सके
बच्चों और युवाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ पोशाक सर्वश्रेष्ठ डांडिया नर्तक और सर्वश्रेष्ठ गरबा प्रदर्शन जैसी प्रतियोगिताएँ भी तैयारियों का हिस्सा होती हैं। इससे सभी लोग इस उत्सव में भाग लेने के लिए अधिक उत्साहित हो जाते हैं

एकजुटता का भाव >
गरबा और डांडिया की तैयारियों का सबसे बड़ा आकर्षण एकजुटता का भाव है पड़ोसी परिवार और दोस्त मिलकर पूरे आयोजन की योजना बनाते हैं यह सिर्फ़ एक नृत्य नहीं बल्कि समाज को एकजुट करने और परंपरा को जीवित रखने का एक माध्यम है उत्सव के दौरान सभी अनुशासन और आपसी सहयोग बनाए रखने का ध्यान रखते हैं
इस प्रकार गरबा और डांडिया उत्सव की तैयारियाँ सिर्फ़ सजावट संगीत या नृत्य तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि परंपरा भक्ति और सामाजिक मेलजोल का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती हैं नवरात्रि के दिनों में गुजरात की गलियाँ चौराहे और पंडाल रोशनी से जगमगा उठते हैं और लोग हर जगह ढोल की थाप पर नाचते नज़र आते हैं। यह त्योहार जीवन में आनंद ऊर्जा और एकता का संदेश देता है
नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा कीपूजा व्रतऔर विशेष अनुष्ठान
वडोदरा पुलिस के सूत्रों के हवाले बड़ी खबर:
— Achlendra Kr. Katiyar (@achlendra) September 9, 2025
गुजरात के वडोदरा में बड़े गरबा आयोजनों (यूनाइटेड वे, VNF, लक्ष्मी विलास पैलेस) को इस बार पुलिस अनुमति आसानी से नहीं मिलेगी। पुलिस की विशेष टीम ग्राउंड रिपोर्ट, सिक्योरिटी इंतजाम और पार्किंग बंदोबस्त की जांच करने बाद देगी NOC। सीसीटीवी… pic.twitter.com/TLE0RLn9FO

