गणेशोत्सव थिरुवनंतपुरम उत्सव त्रिवेंद्रम परेड की खास बातें जो आपको जाननी चाहिए

गणेशोत्सव थिरुवनंतपुरम उत्सव त्रिवेंद्रम परेड की खास बातें जो आपको जाननी चाहिए

गणेशोत्सव की परंपरा महाराष्ट्र से जुड़ी मानी जाती है लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह पूरे भारत में फैल गई है केरल में गणेशोत्सव का आयोजन विशेष रूप से हिंदू जनजागृति समितियों मंदिर समितियों और स्थानीय समुदायों द्वारा किया जाता है। तिरुवनंतपुरम में यह परंपरा 1980 के दशक में और भी लोकप्रिय हो गई जब गणपति की झांकियाँ और जुलूस निकाले जाने लगे

परंपरा और आस्था >

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम अपनी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है यहाँ गणेशोत्सव न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है जिसमें पूरा शहर भाग लेता है। इस अवसर पर आयोजित गणेश परेड यहाँ का विशेष आकर्षण होती है जो रंगारंग भव्य और अनूठी होती है

गणेशोत्सव थिरुवनंतपुरम
PHOTO BY-X.COM
गणेश परेड की विशेषताएँ >

भव्य झाँकियाँ >

परेड में सजाई गई झाँकियाँ भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों जैसे – बाल गणेश सिद्धिविनायक एकदंत महाकाय गणपति आदि को दर्शाती हैं

कई झाँकियाँ रामायण महाभारत और पुराणों के प्रसंग भी दिखाती हैं जो धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देते हैं

पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें >

छेंदा मेलम थायंबक जैसे केरल के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें परेड में गूंजती हैं

ढोल नगाड़ों और शंखों की ध्वनि पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है

नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ >

परेड में भरतनाट्यम कथकली मोहिनीअट्टम जैसे पारंपरिक नृत्य भी प्रस्तुत किए जाते हैं

युवा क्लब और सांस्कृतिक संगठन इसमें भाग लेकर उत्सव को और रंगीन बनाते हैं।

हाथी की सजावट>

केरल की परंपरा के अनुसार परेड में सजे हुए हाथी भी शामिल होते हैं जिन पर सुनहरे आभूषण और छतरियाँ रखी जाती हैं

ये हाथी गणपति की मूर्ति के साथ-साथ चलते हैं जो दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव होता है

सामूहिक भागीदारी >

स्थानीय लोग पर्यटक और आस-पास के गाँवों के लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं

महिला मंडल युवा क्लब और स्कूल-कॉलेज के छात्र भी परेड में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

गणेशोत्सव थिरुवनंतपुरम
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गणेशोत्सव का मुख्य उद्देश्य विघ्नहर्ताभगवान गणेशकी आराधना और समाज में एकता भाईचारे और धार्मिक सद्भाव का संदेश फैलाना है

केरल में यह त्यौहार ओणम के आसपास पड़ता है, जिससे उत्सव का माहौल और भी भव्य हो जाता है

ऐसा माना जाता है कि गणपति की शोभायात्रा में शामिल होने और उनके दर्शन करने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है

परेड आमतौर पर पझवंगडी गणपति मंदिर जैसे किसी प्रमुख मंदिर से शुरू होती है।

यह परेड शहर के मुख्य मार्गों से होकर किसी नदी झील या समुद्र तट पर पहुँचती है जहाँ गणपति का विसर्जन किया जाता है।

तिरुवनंतपुरम में गणेशोत्सव परेड सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि कला संस्कृति और आस्था का एक भव्य संगम है इसकी भव्यता रंग-बिरंगी झांकियाँ पारंपरिक संगीत और नृत्य इसे एक ऐसा अनुभव बनाते हैं जो दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाता है

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