पश्चिम बंगाल की एक मछली जिसके आगमन में मनाया जाता है भब्य उत्सव
इलिश उत्सव या सुंदरबन हिल्सा महोत्सव बंगाल की प्रसिद्ध इलिश मछली के आगमन के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला एक मौसमी त्योहार है यह त्योहार विशेष रूप से जुलाई से सितंबर तक मनाया जाता है, जब इलिश अपने प्रजनन काल के लिए समुद्र से नदियों की ओर प्रवास करती है यह उत्सव सुंदरबन डेल्टा में आयोजित किया जाता है जहाँ इस मछली को पारंपरिक व्यंजनों में परोसा जाता है और साथ ही इको-टूरिज्म का भी आनंद लिया जाता है
भारत की सांस्कृतिक विरासत में त्योहारों का एक विशेष स्थान है और हर राज्य के अपने पारंपरिक आयोजन होते हैं पश्चिम बंगाल में मनाया जाने वाला इलिश उत्सव इन्हीं खास आयोजनों में से एक है यह सिर्फ़ खाने-पीने का उत्सव नहीं है बल्कि बंगालियों के जीवन संस्कृति और स्वाद से जुड़ी भावनाओं का उत्सव है इस उत्सव का केंद्र है – इलिश मछली जिसे बंगाली व्यंजनों में रानी मछली कहा जाता है
इलिश मछली का महत्व
इलिश मछली बंगालियों के लिए सिर्फ एक समुद्री भोजन नहीं बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है यह खासतौर पर मानसून के मौसम में पाई जाती है जब यह गंगा और पद्मा नदी के मीठे पानी में आकर पकड़ी जाती है इसके नर्म रसीले और स्वादिष्ट मांस का कोई मुकाबला नहीं बंगाली रसोई में इलिश का स्थान उतना ही खास है जितना उत्तर भारत में लड्डू या जलेबी का त्योहारों में

इलिश उत्सव एक विशेष प्रकार का भोजन उत्सव है जो मुख्य रूप से महीनों के दौरान मनाया जाता है इस समय विभिन्न होटल रेस्तरां और क्लब इलिश के विभिन्न व्यंजनों का विशेष मेनू तैयार करते हैं कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग विचारधाराओं में लोग इस समय इलिश पतुरी इलिश स्टीमा शोरशे इलिश इलिश बिरयानी और यहां तक कि इलिश से बने प्यारे दोस्तों का भी आनंद लेते हैं
सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व
सांस्कृतिक परंपरा साहित्य कविता और कला में इलिश का कई बार उल्लेख मिलता है यह सिर्फ़ एक भोजन नहीं है बल्कि इसका एक सादृश्यात्मक संबंध भी है
आर्थिक योगदान त्योहार के दौरान इलिश की बिक्री से मछली और मछली बाज़ार को अच्छी आमदनी होती है
पर्यटन योगदान इस त्योहार को देखने और इसके साक्षी बनने के लिए आप बंगाल की सैर पर भी जा सकते हैं
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इलिश मछली गंगा और पद्मा नदियों में भी पाई जाती है इसका स्वाद और उत्सव बांग्लादेश में भी उतना ही लोकप्रिय है और बंगाल में यह त्यौहार वहाँ से मछलियाँ आयात करके और भी खास बना दिया जाता है
पहले इलिश उत्सव घरों और स्थानीय मेलों तक ही सीमित था लेकिन अब यह होटलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के रेस्टोरेंट में बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है सोशल मीडिया ने भी इसकी लोकप्रियता बढ़ा दी है जहाँ लोग अपने इलिश व्यंजनों की तस्वीरें साझा करते हैं


