दीव और आसपास के तटीय इलाकों में जब मछली पकड़ने का त्यौहार आता है तो मछुआरा समुदाय कई दिन पहले से इसकी तैयारी शुरू कर देता है यह सिर्फ़ एक त्यौहार नहीं बल्कि उनके जीवन और आजीविका का प्रतीक है इसलिए पूरा गाँव इसकी तैयारी में जुट जाता है। मानसून खत्म होते ही जब समुद्र शांत हो जाता है और मछली पकड़ने का मौसम शुरू होता है मछुआरे अपनी नावों को समुद्र से बाहर निकालकर उनकी सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर देते हैं। लकड़ी की नावों में अगर कोई दरार या क्षति होती है तो उसकी मरम्मत की जाती है। इसके लिए ख़ास तौर पर नाव बनाने वाले पुराने और अनुभवी कारीगरों को बुलाया जाता है
दीव फिशिंग महोत्सवनावों की मरम्मत के बाद उनकी रंगाई-पुताई शुरू होती है। नाव को नीले हरे लाल और पीले जैसे चटख रंगों से रंगा जाता है ताकि समुद्र में दूर से भी वह आकर्षक लगे। नावों पर पारंपरिक डिज़ाइन फूल-पत्तियों के चित्र और धार्मिक प्रतीक भी बनाए जाते हैं। कई बार नाव के आगे वाले हिस्से पर भगवान वरुण भगवान शिव या स्थानीय समुद्री देवताओं के चित्र बनाए जाते हैं जिससे नाव में यात्रा करना सुरक्षित माना जाता है
इसके बाद सजावट की तैयारियाँ शुरू होती हैं महिलाएं और बच्चे नावों के लिए रंग-बिरंगे झंडे कागज़ की झालरें और फूलों की मालाएँ तैयार करते हैं नाव पर लहराने वाले झंडे ज़्यादातर लाल पीले और हरे रंग के होते हैं जिन्हें शुभ माना जाता है कुछ परिवार अपनी नाव के लिए ख़ास कढ़ाई वाला कपड़ा भी बनवाते हैं जिसे नाव के किनारों पर सजाया जाता है फूलों में गेंदा और मोगरा का इस्तेमाल ज़्यादा होता है क्योंकि इनकी खुशबू और रंग लंबे समय तक टिकते हैं

खाश त्यारिया >
इंजन की मरम्मत जालों की मरम्मत रस्सियों को मज़बूत करना और लंगर लगाना इस तैयारी के महत्वपूर्ण भाग हैं जालों को एक बड़े आँगन या समुद्र तट पर फैलाकर जाँच की जाती है कि कहीं वे फटे तो नहीं हैं। यह काम ज़्यादातर बुज़ुर्ग और अनुभवी मछुआरे करते हैं
त्योहार से पहले सामूहिक पूजा की भी तैयारी की जाती है इसके लिए किसी मंदिर या समुद्र तट पर किसी विशेष स्थान पर पूजा का आयोजन किया जाता है पूजा में नारियल अगरबत्ती दीप मिठाई और ताज़ा फूल चढ़ाए जाते हैं महिलाएँ सुबह-सुबह घर पर विशेष व्यंजन तैयार करती हैं जैसे नारियल के व्यंजन मीठे चावल और समुद्री व्यंजन पूजा के समय सभी नावों को समुद्र तट पर एक साथ खड़ा किया जाता है और पुजारी मंत्रोच्चार करते हुए समुद्र से आशीर्वाद लेते हैं

त्योहार से एक दिन पहले रात में गाँव में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ढोल की थाप लोकगीत और पुर्तगाली नृत्यों से वातावरण में उत्साह भर जाता है। युवा लड़के-लड़कियाँ पारंपरिक वेशभूषा में नाचते हैं और समुद्र तट पर अलाव के चारों ओर गीत गाते हैं। मछुआरों के पारंपरिक गीत गाना भी खास होता है, जो समुद्र, नावों और मछली पकड़ने की कहानियाँ सुनाते हैं।
त्योहार की सुबह मछुआरे जल्दी उठते हैं और नावों को अंतिम रूप देते हैं। हवा में लहराने के लिए झंडे मज़बूती से बाँधे जाते हैं और नावों के किनारों पर फूलों की मालाएँ रखी जाती हैं। महिलाएँ नावों पर हल्दी और सिंदूर का तिलक लगाती हैं और शुभकामनाओं के लिए नारियल फोड़ती हैं
जब सब कुछ तैयार हो जाता है तो नावों को एक-एक करके पानी में उतारा जाता है। इस दौरान किनारे पर खड़े ग्रामीण ढोल और शंख की ध्वनि से उनका स्वागत करते हैं। नावें समुद्र की लहरों पर झूमती हुई आगे बढ़ती हैं और धीरे-धीरे एक साथ जुलूस का रूप ले लेती हैं। इस पल के रोमांच और आनंद को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। नावों का यह समुद्री जुलूस रंगों संगीत और उत्साह से भरपूर होता है
तैयारियों के इस पूरे क्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें न केवल मछुआरे बल्कि पूरा समुदाय शामिल होता है बच्चे महिलाएं बुजुर्ग – हर कोई अपने-अपने तरीके से योगदान देता है। यह न केवल एक उत्सव की तैयारी है बल्कि साथ मिलकर काम करने एक-दूसरे की मदद करने और अपनी परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर भी है
मछुआरा समुदाय की जीवनशैली जिसमें समुद्र पर सजी हुई नावें परेड करती हैंदीव फिशिंग फेस्टिवल
करोड़ो श्रद्धालु है तो हज़ारो नावे भी संगम तट पर है।
— Baliyan (@Baliyan_x) January 13, 2025
लाखो पक्षी जो अधिक सर्दी में रूस से आते है वो भी चहचहा रहे है।
वायु, जल, पक्षी, मनुष्य, प्रकृति सबका सनातन स्वागत करता है, सबको अपने में समाहित करता है ❤️ pic.twitter.com/JXLASS0Z1n

